परिणाम में सुधार के पीछे कई कारण हैं. पिछले ढाई दशक में बोर्ड के नियमों में व्यापक बदलाव का भी असर हुआ है. 1992 में जब सबसे खराब रिजल्ट आया था, उस समय हाईस्कूल के 6 विषयों में से किसी एक विषय में फेल होने पर परीक्षार्थी फेल हो जाता था.from Latest News उत्तर प्रदेश News18 हिंदी http://bit.ly/2GEZ3tm
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