दरअसल पिछले तीन दशक से यूपी में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस अब सिर्फ अमेठी और रायबरेली तक ही सिमित है. यही वजह है कि 12 जनवरी को सपा-बसपा के बीच हुए गठबंधन में उसे तवज्जो नहीं दी गई. जिसके बाद कांग्रेस के लिए यूपी की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारना एक बड़ी चुनौती थी.from Latest News उत्तर प्रदेश News18 हिंदी http://bit.ly/2FMiJMG
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